छत्तीसगढ़

फिंगेश्वर शिक्षा विभाग में करोड़ों की एरियर्स राशि पर सवाल: 1.35 करोड़ की शेष राशि से कथित वित्तीय अनियमितता का आरोप

गरियाबंद | खबरी न्यूज़ ब्यूरो

गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय में सर्व शिक्षा अभियान (SSA) के तहत एरियर्स राशि के भुगतान से जुड़ा एक गंभीर वित्तीय मामला सामने आया है। उपलब्ध दस्तावेजों और शिकायतकर्ताओं के दावों के आधार पर यह आरोप लगाया गया है कि संविलयन के बाद भी SSA का बैंक खाता वर्षों तक संचालित होता रहा और लाखों रुपये की निकासी हुई। मामले में स्वतंत्र वित्तीय जांच की मांग तेज हो गई है।

2015-16 और 2016-17 में जारी हुआ लगभग 3 करोड़ का आवंटन जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2015-16 और 2016-17 के दौरान सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत कार्यरत शिक्षाकर्मियों के एरियर्स भुगतान के लिए लगभग 3 करोड़ रुपये का आवंटन जारी किया गया था। एरियर्स भुगतान के बाद भी बड़ी राशि खाते में शेष रह गई।

संविलयन के बाद बची 1.35 करोड़ रुपये की राशि 1 जुलाई 2018 को शिक्षाकर्मियों का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलयन हो गया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उस समय SSA मद में लगभग 1.35 करोड़ रुपये शेष थे। आरोप है कि इस राशि को शासन अथवा संबंधित विभाग को वापस करने के बजाय खाते में ही रखा गया और इसकी विधिवत सूचना भी नहीं दी गई।

2018 से 2025 के बीच 63 लाख रुपये निकासी का आरोप शिकायतकर्ताओं के अनुसार, संविलयन के बाद भी SSA का बैंक खाता बंद नहीं किया गया। आरोप है कि वर्ष 2018 से 2025 के बीच चेक और बैंक लेन-देन के माध्यम से करीब 63 लाख रुपये आहरित किए गए।

रिकॉर्ड में नहीं मिला निकासी का विवरण मामले का सबसे गंभीर पक्ष यह बताया जा रहा है कि कथित रूप से निकाली गई राशि का उल्लेख कैशबुक, लेखा रजिस्टर या अन्य वित्तीय अभिलेखों में नहीं मिला। सूत्रों का दावा है कि बैंक दस्तावेज निकासी की पुष्टि करते हैं, जबकि कार्यालयीय रिकॉर्ड में उसका समुचित विवरण उपलब्ध नहीं है। इससे सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।

सभी तत्कालीन अधिकारियों की जांच की मांग शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि वर्ष 2015 से 2025 के बीच फिंगेश्वर में पदस्थ रहे सभी तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO), बैंक खाते के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं, आहरण एवं संवितरण अधिकारियों तथा संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि किस अधिकारी के कार्यकाल में कितनी राशि निकाली गई।

अन्य योजनाओं के खातों पर भी उठे सवाल आरोप केवल सर्व शिक्षा अभियान तक सीमित नहीं हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि शिक्षा विभाग, मध्यान्ह भोजन योजना सहित अन्य योजनाओं के बैंक खातों में भी बड़ी राशि लंबे समय तक रखी गई और वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है। इसलिए सभी खातों की स्वतंत्र वित्तीय एवं फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है।

दस्तावेज सार्वजनिक करने और उच्चस्तरीय शिकायत की तैयारी सूत्रों के अनुसार, मामले से जुड़े बैंक स्टेटमेंट, चेक और भुगतान संबंधी दस्तावेज जल्द सार्वजनिक किए जाएंगे। शिकायत जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री और अन्य सक्षम प्राधिकारियों को भेजने की तैयारी है।उच्च न्यायालय जाने की चेतावनी शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर मामला उच्च न्यायालय तक ले जाया जाएगा।

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